करार न था
बाट देखें भी तो कब तक कोई आने का करार न था बैठें हैं राह में के कहीं वो ये न कहे आज मेरा इंतज़ार न था सुबह से शाम हो गयी और शाम अब रात में तब्दील हुई जाती है सोये जब आँखों में नींद तो थी गरचे नींद का खुमार न था उफक के सभी अख्तर बेसब्र हुए जाते हैं बेचारे तुम्हारी चाहतों में क्यूँकर उनका शुमार न था