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Showing posts with the label प्यार

Best wishes to u

हर ज़र्रा रौशनी का आपको दिया हर लम्हा ख़ुशी का आपके नाम किया दुआओं का सिलसिला यूं ही चलता रहे तहे दिल से ये आपके दिल को पैगाम दिया हाँ, मिल नहीं सकते इसका रंज है इसलिए फासलों से सलाम आपको किया गर जिंदगी रहे तो इंशाल्लाह एक दिन आपसे मिलने का वादा सरे-आम किया

मुकाम

उफ़!!! इतनी इज्ज़त मिली जिसके हम काबिल न थे ये मुकाम जो आज मिले हमे अब तक हासिल न थे ***** एक आदत सी पड़ गयी है उनको हमे छेड़ जाने की क्या कहें उनसे के अब रुत बीत गयी रूठने मनाने की हर पल इंतज़ार रहता था उनके आने का हमे, लेकिन वक़्त ने इजाज़त नहीं दी उन्हें मेरे पास आने की ****** तेरी ख्यालों में वक़्त गुज़रता है आजकल ज़हन में सिर्फ तेरा मुजस्मा समाता है हर लम्हा तेरे जानिब दिल खिंचता है हर ख्वाब तेरी आँखों में बसना चाहता है

एक बार कोशिश करो

आप कब तक, आप कहने की रसम निभायेंगे? तुम तक पहुँचने में और कितना वक़्त लगायेंगे? बदती जा रही है चाहतें हमारी पुरजोर आप कब हमारे इतना करीब आयेंगे? हम गुस्ताखी पर अमादा होने हों को हैं आप कब बीच की दूरियों को मिटायेंगे? अब तलक हमे भी हिचक है बे-तकल्लुफी से आप कब तक ओर तकल्लुफ़ फ़रमायेंगे? इन मासूम रिश्तों को परवान चदने दीजिये आब कब तक इन रिवाजों को निभाएंगे? आपके लफ्जों में इज्ज़त है आशनाई नहीं आप कब हमसे यूँ आशना हो पायेंगे? एक बार कोशिश करो तुम कहने की हमे आपके आप आप में वरना हम बे-मौत मारे जायेंगे

दुआ के साथ

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इस दिल न पूछ ए दोस्त इसमें सिर्फ प्यार है अपने दोस्तो के लिए दुआएं बेशुमार हैं इस प्यार की हदें कोई रिश्ते से नहीं बंधी इस प्यार में कोई उमीदें भी नहीं इस प्यार का जज्बा पाक है के इसमें एक अटूट ऐतबार है अपने दोस्तो के लिए दुआएं बेशुमार हैं

कोशिश

कामयाबी भी कोशिशों के कदम चूमती है हर चीज़ जहाँ में कोशिशों को ढूँढती है रवानियाँ होती है ख़्वाबों में अक्सर ख्वाइशें असलियतें मगर सिर्फ मेहनत का पता पूछती है प्यार मौका परास्त नहीं प्यार मौका देता है जहाँ में प्यार देने वाला प्यार ही लेता है प्यार में कामयाबी तो सबको नसीब नहीं होती प्यार का जज्बा मगर कामयाबी से भी कीमती है...

हिजाब में

हमारी पलकें झुक कर भी बातें करती हैं हौले हौले दिल की बातें यूँ ही कहने दें पर्दा-नशीं रहना हमारी फितरत है हिजाब में हमे यूँ ही रहने दें खुल के मिलना रुसवाई करता है दुनिया की आँखों में हर लम्हा खटकता है मुस्कुराने से हमारे, लोगों का दिल धड़कता है हमे बस अपनी खामोशी में यूँ ही रहने दें हौले हौले दिल की बातें यूँ ही कहने दें

किस तरह बुलाएं उन्हें..

किस तरह अब उनको बुलाएं, कोई तरकीब नज़र नहीं आती उनकी तस्वीर सा अब तो पलकें भी उठाई नहीं जाती सताने का गर शौक था उन्हें, तो हम भी लुत्फ़ उठाते थे बेहिसाब उन गुस्ताखियों को अब तरसते हैं क्यूंकि अब तक वो शरारतें भुलाई नहीं जाती उसको हर पल जूनून था मेरी मोहब्बत का अपना हाल भी मानिंदे आशिक था क्या करें बेबस हैं कि इश्क की फितनागिरी यूँ भी उतारी नहीं जाती

बर्दास्त करना सिखाती हैं

हमारी हदें दरिया की लहरें हैं जो बाँध बनने पे ही काबू आती हैं उनकी हदें सागर सी गहरी हैं जो साहिल तक आकर भी लौट जाती हैं हमारी हसरतें एक जिद बन कर अक्सर उन्हें सताती हैं उनकी ख्वाइशें उनके लबों पे आकर खामोश हो जाती हैं हमारी मोहब्बतें एक तपिश बन कर हमे दिन रात जलाती हैं उनकी चाहतें चांदनी बनकर नूर हमपर बरसाती हैं हमे हमारी दूरियां हर वक़्त हर लम्हा तड़पाती हैं मगर उनकी मजबूरियां उनको ये दूरियां बर्दाश्त करना सिखाती हैं...

मोहब्बत का एक इम्तेहान ऐसा भी होता है

पतंगे उड़ते हैं शमा की तरफ, शम्मा उन्हें जला देती हैं मोहब्बत का एक इम्तेहान ऐसा भी होता है जब जीने की आस में, प्यार करने वाले जिंदगी ढूँढ़ते हैं ओर जिंदगी मौत बन के उनको गले लगा लेती है हर रात शमा पिघलती है या रोती है मालूम नहीं लेकिन हर रात ढलते ढलते सुबह को अजमा लेती है आफताब की रौशनी में, पतंगे बेचारे दिखते ही नहीं माह की चाह लेकिन चकोर की नींदे चुरा लेती है

आशिक

मेरा भी एक आशिक था जो जाने कहाँ खो गया मुद्दत हुई है उसका जूनून-ए-इश्क सो गया अब तुमसे हाल-ए-दिल न बांटे तो क्या करें जो दिल में बसता था वो कब से पराया हो गया न खोज खबर लेता है अब न अपना हाल बताता है न जाने क्यों अब वो हमसे नज़र चुराता है वक़्त था हमारा कभी अब वक़्त किसी ओर का हो गया मेरा भी एक आशिक था जो जाने कहाँ खो गया

वो बोसा

मेरी नाज़ुक गर्दन पे,, तेरा वो बोसा आतिश भरा, उफ़, ऐसी अजब हरारत, दम अब निकला की अब निकला, मुलायम पैकर, तराशा हुआ, मरमरी और रेशमी, तेरी आँखों की गर्मी से, अब पिघला की अब अब पिघला, होंठ मखमली कांपते हुए , सुर्खी आफताब की, तेरा दिल मचल के, न तब संभला न अब संभला, नर्म गेशुओं की छावं, झुका के तेरे चेहरे पे, मेरा आंचल अनजाने में, जो ढला के यूँ ढला...

मुझे भी तुम मंजूर कर लो.

दे रही है रुक रुक के मेरी आँखें झुक झुक के शर्माता हुआ इक सलाम तुम कबूल कर लो तड़पती हुई हर धड़कन चाहे तुमको छूना इक बार, पास आके थामो मुझे और शिद्दत महसूस कर लो, किसी को प्यार कर करना, जुर्म तो नहीं, न गुनाह ही है, दावत हम देते हैं तुम्हे प्यारा सा इक कुसूर कर लो मैंने कबूला सौ बार तुम्हे, नहीं अब आरजू किसी की, गुजारिश बस इतनी सी कि, मुझे भी तुम मंजूर कर लो.

वक़्त-ए-रुक्सती

तेरी तस्वीर आखों में बसा लूं फिर यहाँ से चला जाउंगा अपनी तकदीर की लकीरें मिटा लूं फिर यहाँ से चला जाउंगा भूल जाने की कोशिशे तुझको, मुझको दीवाना न बना दे, इसलिए तेरी याद यहीं दफना लूं फिर यहाँ से चला जाउंगा फिर हँसे साथ हम तुम, ये मंजूर न जालिम ज़माने को, अपने साथ तुझे भी रुला लूं, फिर यहाँ से चला जाउंगा बांटी थी तुझसे सिर्फ बहारें मैंने , और समेटे सारे पतझड़ अकेले, अपने वो दर्द तुझको दिखा लूँ फिर यहाँ से चला जाउंगा तुझको चाह के कुफ्र किया, बुत-ए-अरमान बना के पूजा अपने उस जुर्म की सजा पा लूं फिर यहाँ से चला जाउंगा फूल दिया था तुने कभी, उसके कांटो की चुभन अब भी है, वो सोगात दिल से छुपा लूं फिर यहाँ से चला जाउंगा

रिश्ता

इक रिश्ता, न चाहतों का, न जरुरतो का, न गमगिनियों का, न फुरकुतों का, न ना-उम्मीदियों का, न उम्मीदों का, न बंदिशों का, न सहूलतों का, सिर दोस्ती का, प्यार का, ,और मस्सर्रतों का.. इक रिश्ता, न इन्तिजारों का, न इम्तिहानो का, न इब्तिदाओं का न इन्तिहाओं का, न अशिकियों का, न दिल्गिरियों का, न दूरियों का, न मजबूरियों का, सिर्फ दोस्ती का, प्यार का, और नजदिकियों का, तुम ये इक रिश्ता कुबूल करोगे, क्या मुझसे दोस्ती करने की भूल करोगे?

इकरार

आपके सब्र के पैमाने के, छलकने का इंतिज़ार है, ये हम जानते हैं कि, दिल आपका बेकरार है, न मानो न बताओ न सही, मगर बहुत थोड़ा सा, आपको भी हमसे प्यार है.... न न हम इसका दावा नहीं करते, न ही आपके ऊपर, हमारा कोई इख्तियार है, मगर ये बेबुनियाद ख्याल नहीं, जी आपका भी दिल हमारा, तलबगार है, आपको भी हमसे प्यार है....

इक जनम जी आयें

इक जनम जी आयें चलो उन पलों को फिर दोहराएँ, जिसने हमें जीने के, नए ज़रिये दिखाए चलो, उन लम्हों में, फिर घूम आयें, जहाँ हमने ज़िन्दगी के. हसीं पल बिताये, चलो, उस वक़्त को, कहीं से खोज लायें, जो तुम्हारे साथ, कहीं थम न जाये, चलो, यहाँ से दूर, बहुत दूर जहाँ, ये धरती ये आसमान, हमारी तरह, इक हो जाये, चलो, इक बार फिर वहाँ जहाँ हम, थोड़े वक़्त में, इक जनम जी आयें

अजनबी से गुफ्तगू

जितने खूबसूरत अल्फाज़ उतने ही प्यारे जज्बात एक अनजान के अंदाज़-ए-बयानी ने हमे हैरान कर दिया.... न रिश्तों की कोई डोर न कोई जुम्बिश हुई न शोर फिर क्यों इस अजनबी की बातों ने हमे बे-बयान कर दिया....

बिन बुलाये इधर आइये ....

ऐसा तो नहीं के आप यहाँ से गुज़रते नहीं फिर क्यों हम से दुआ सलाम भी नहीं करते, ये ज़रूरी तो नहीं के हर रोज़ हम सजदा करें कभी तो आप भी इस नाचीज़ पे गौर फरमाइये .. हर सुबह का पहला आदाब आपको करते हैं फिर उस वक़्त का इंतज़ार होता है जब आप जवाब देंगे ये हसरत मगर रोजाना जागती है भोली भाली कभी किसी रोज़ आप भी बिन बुलाये इधा आइये .

अंधेरों में रौशनी जलाए रखें ...

नाशाद दिल ही अक्सर बेजार होता है गम में अंधेरों से भी प्यार होता है इसलिए ए दोस्त शादमानी बनाएं रखें आपसे बस इतनी गुजारिश है के आलम-ए-तिरगी में भी एक चिराग रौशनी का जलाए रखें.... उदासी ... इतनी उदासी के सारा आलम उदास हो गया आपके दर्द का असर इतना ख़ास हो गया दूर बैठें हैं हम मील-दर-मील फिर भी आपकी शिदद्दत का आभास हो गया

ख़याल...

हम पीते नही पिलाते हैं नशे में लोगों को बहकाते हैं आप धोखा न खा लेना ए दोस्त हम तो पानी को छूकर मय बनाते हैं **** अब भी मेरी निगाहें तुझपे झुकीं हैं अब भी मेरी साँसे तुम पे रुकी हैं तुम पूछते हो किसकी राह ताकूँ अब तेरी राहों में यहाँ मेरी बिछी हैं ... *** सफर सबको तनहा करना पड़ता है, मंजिल मगर एक निकलती है, काफिलों का हुजूम जब निकलता है, धुल की आंधी चलती है *** किसी का इंतज़ार करते करते पथरा जाती है नज़र, वो आते हैं और नज़र के बचा लौट जाते हैं अब क्या शिकवा करें किसी से जब के हम जानते हैं के वो आजकल गैरों के साथ वक़्त बिताते हैं ... **** तिशनगी और बदती है उनके पास आने से और वो दूर जाएं तो मुई ये जान निकलती है *** अपनी जिंदगी से मिले एक अरसा गुज़र चुका यूँ मर मर के जीना कोई जिंदगी तो नहीं? ख़्वाबों में देखा कभी तो देखते ही रह गए क्या हसीन थी कभी, जो अब मेरी रही नहीं... *** उन्हें हमारे खवाब तक नहीं आते, और हम उनके ख्वाबों में ज़िन्दगी गुजार जायंगे, ये खुदा कभी ये न सोचा था की, हम मानिन्दे, दीवाना उन्हें चाहेंगे.... **** तेरी राह, तेरी मंजिल, तेरी रहगुज़र, नही मुझसे कोई वाबस्ता नही' न ज...