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ज़िन्दगी

ज़िन्दगी एक किताब नही जिसे पड़ लिया और ख़तम हो गई... ज़िन्दगी एक पुलिंदा है कोरे कागजों का, जिसका हर पन्ना एक हिकायत का हक़दार है.... इसे जी भर के जियो और अपने तजुर्बे इस पर लिखो.... फिर वोह चाहे अच्छे हो या बुरे.... keep smiling... smiling thru tears make ur eyes glisten like diamonds.... आपकी बातों को फासलों से गुज़र जाने की आदत है कोई इंतज़ार करे तो किया करे, खैर आपकी बला से

एक अनजाना

कोई बंद दरवाजा दोबारा खटखटा रहा है एक अनजाना शख्स करीब आ रहा है अंदाज़-ए-बयानी का अंदाज़ कुछ नया सा है हाल-ए-दिल पहेलियों में सुना रहा है गुपचुप सारे जहां का हाल बताता है हर रोज़ एक नया किस्सा सुनाता है मेरे कानों में हौले से गुनगुनाकर न जाने कितने गीत बुनता जाता है हजारों ख्वाब मेरी सूनी पलकों पर अपने हाथों से सजा रहा है कोई बंद दरवाजा दोबारा खटखटा रहा है एक अनजाना शख्स करीब आ रहा है मेरी धडकनों में अपना नाम सुनता है मेरी साँसों से अपनी साँसें चुनता है उसकी कोशिशों की क्या मिसाल दूं, के उनको कामयाबी का जरिया बना रहा है कोई बंद दरवाजा दोबारा खटखटा रहा है एक अनजाना शख्स करीब आ रहा है ****** आपके खाव्बों की रहगुज़र से मेरा रस्ता भी गुज़रता है तस्कीनियाँ आपकी आरजू है, शादमानी मेरी हसरत हैं

किस्मत

दिल के अमीर अक्सर जेब से फकीर होते हैं बे-ज़मीरों की इस दुनिया चंद ही बा-ज़मीर होते हैं हक छीनने वाले चप्पे चप्पे पे मिल जायेंगे लेकिन हक का देने वाले शुमार में बसीर होते हैं हंस दे कोई मुफलिसी में तो खुदा का नेक बन्दा है गरीबी में ही इंसान नानक और कबीर होते हैं जुल्म करना आदमी की फितरत में मौजूद है ज़ुल्म सहने वाले आदमियत की तामीर होते हैं तू गम न कर, यहाँ हर तरह के लोग हैं कोई तकदीरवाले हैं कोई किस्मत से हकीर होते हैं

मेरा तार्रुफ़

मैं वो हवा हूँ जो हमेशा बहती है मैं वो घटा हूँ जो बरसती रहती है मेरी साँसों की खुशबू से महकते ही सारी फिजा मेरी धरकन से वक़्त की रवायत चलती है मेरी तबस्सुम को तरसते हैं गुल -ओ -गुलज़ार , मेरे तसव्वुर से हूर -ए -जन्नत जलती है मुझसे सुबह होती है , मुझसे शाम ढलती है ...

Hurricane rita

कुछ तिनके जोड़े हैं, कुछ गुंजल सुलझाए हैं कुछ सपनो को निचोड़ कर हमने रंग बनाए हैं कई फासले तय करे, कई रास्ते साथ लिए कभी धूप चुराकर, कभी साए थाम लिए थोडी सी कच्ची मिट्टी, थोड़ा सा ठंडा पानी कभी दबी हुई सी हंसी , कभी अश्कों की कहानी कुछ तूफ़ान समेट कर कुछ हवाएं लपेट कर हम रीता के नाम से इस दुनिया में आये हैं..... ***** मेरी परवाज़ का अंदाज़ आप यूँ भी लगा सकते हैं के मेरे पंखों में सबा का ठिकाना है जो असमाँ में उडू तो उसको भी झुका दूं के तारों के पार मेरा आशियाना है

एक लड़का

एक नटखट लड़का है कहीं पर जो गीत चुनता है अपने लफ्जों में ना जाने कितने ख्वाब बुनता है उसकी कलम में एक जादू है और हाथों में एक तिशनगी जाने क्या कुछ कह जाता है जाने क्या कुछ सुनता है कभी कभी एक खामोश आवाज़ देता है कभी कभी जोर से फिर चुप हो जाता है उस शख्स का क्या कहना जो खारों से गुलाब चुनता है निगाहें भी बयानी से कभी बाज़ नही आती उसकी तस्वीरों में से भी यू लगे मेरे दिल की सब बातें सुनता है मुझ पे अपने शब्दों की एक खूबसूरत से ओदनी डालता है न जाने कहाँ से वो इतनी रेशमी गज़लें बुनता है

एक ख़ास दोस्त के लिए....

कभी अजनबी था अब दोस्तों से ज्यादा करीब है मेरी जान का हाफिज़ और मेरा हबीब है तुझसे मिलाने वाला महरबानी कर गया उसके रानाइयों के सदके तू मेरा नसीब है.... मेरे दर पे सिर्फ जोगी आते हैं आपके आने से हम पे रंग-ए-जमाल आ गया सर उठा के उसपे जब आँख भर देखा तो चेहरे पे मेरे, बेकरार दिल का हाल आ गया जो दर्द मिट गया उसकी शिद्दत भी मिट गयी जो ज़ख्म भर गया उसकी टीस घट गयी तू बारहा न खोल उन बंद खिड़कियों को जो वक़्त के थपेडो से खुद ही सिमट गयी तबस्सुम मेरे चहरे पे भी खिल खिल जाती है जब तेरा खिलता हुआ मुजस्मा नज़र आता है तेरी नज़र गुफ्तगू करती है मेरी निगाहों से तेरा मुस्काना उसपे तेरा जमाल-ए-रू बढाता है

आपकी नज़र

मेरे दिल का हर गोश कभी मोहब्बत से आबाद था यहाँ गुंजाइश नही थी किसी गम की होने की बस सोया सा, बेसुध सा, गुमसुम सा पड़ा था ये आपने चुप चाप से कैसी दस्तक दी..... बस कहीं एक खालीपन सा छा रहा था न रंजिश थी इसमें न नफरत इसमें थी जगाया कितने अरमानों को हौले से पुकार के कितनी मासूमियत से आपने ये प्यारी हरक़त की....

पहलू में

क्यों मुझसे वो पता पूछते हैं मेरा जब उनके पहलू में वक़्त बिताया जाता है खुद को खुद की खबर तक नहीं होती जब उनका चेहरा सामने आता है

मेरी तमन्ना

मेरी तमन्ना न कर ए दीवाने मेरी हस्ती ही क्या है इस ज़माने में यहाँ हर मोड़ पे हुस्न पड़ा हुआ है हर कोना इश्क से सजा हुआ है पहनके रिश्तों के तागे ओद ले रास्तों के साए के यहाँ हर रहगुज़र पे कोई अपना ही खडा हुआ है

हमने उसको हर वक्त महसूस किया हैं

ना तलाशते थे ख़ुशी, न गमों का हिसाब रखते हैं हमने जिंदगी की हर शक्ल को खुल के जीया है यहाँ आब-ओ-हयात और ज़हर में ज्यादा फर्क नहीं हमने दोनों को बड़े शौक से पीया है कभी जाम में नशा नहीं होता नशे का अहसास हमने खाली प्याले में भी किया है उसके शबाब का कोई सानी नहीं इस जहाँ में जिसकी अदाओं को हमने आँखों से पीया है एक लम्हा भी मेरे पास नहीं, एक लम्हा भी दूर नहीं न मेरा है, न पराया, न भूला, न याद आया फिर भी वो एक शख्स हमेशा मेरे साथ जीया है....

फितरत

हर आदमी मौसम है, बदलता है, बरस में… कई कई बार… रुकता है, देखता है, छेड़ता है, बरस में.. कई कई बार… हर फूल की हसरत हर खुशबू की जुस्तजू हर कलि की चाहत , बरस में कई कई बार…. दिल तोड़ता , दिलों से खेलता दिल की हसरतें , पूरी करता हर किसी से दिल लगता, बरस में कई कई बार….

जीतना ही मकसद है ....

कौन चाहता है हौसला रखना हारना किसको भाता है जीतना इंसान की हसरत होती है जीत के ही जीया जाता है झूठे हैं वो जो कहते हैं सब्र रखो सब्र इंसान की फितरत ही नहीं ख्वाइश अगर जीने की हो तो मरना कौन चाहता है … सिर्फ लफ्ज़ हैं ये कोरे के हार पे दिल छोटा नहीं करते हकीक़त में इस जहाँ में हर शख्स सिर्फ जीतना चाहता है … कौन खुश होता है तरक्की से गैर की कौन है जो पराई ख़ुशी में सुकून पाता है इस ज़माने में उससे पूछते हैं सब जो हमेशा सिर्फ अव्वल आता है …. जिंदगी की मशश्क़त में सबको जीत की तलाश होती है डूबते को तिनके भी नहीं मिलता उगते सूरज को सलाम किया जाता है …

इंसान नहीं बदलता ....

कभी एक रात का साथ ज़िन्दगी भर नहीं चलता हवाओं के रुख शद बदले मौसम नहीं बदलता न ख्वाईशें होती हैं कभी, न आरजू ख़तम हवस इंसान की फितरत है, इंसान नहीं बदलता तूफ़ान थम भी जाए, साहिल पनाह नहीं देता किश्ती डूबने पे नाखुदा, खुद पे गुनाह नहीं लेता हर शख्स भूखा है, भूख का अरमान नहीं बदलता के हवस इंसान की फितरत है, इंसान नहीं बदलता

दोस्ती इल्जाम नहीं दुआ है

बदनामी में भी एक नशा है इश्क में नाकाम होने से दर क्यों पहली नाकामी ही इश्क की इब्तदा है... जज्बात तो बहुत हैं सीने में लेकिन हर जज्बात का अपना एक मज़ा है इश्क हुआ तो ज़िन्दगी खुशगवार है न हुआ तो जीना ही सज़ा है ....

अनजाना

कोई अनजान निगाहे मेरा पीछा किये जाती है, चलते चलते मुझे वो आवाज़ दिए जाती है, वाकिफ नहीं में उस अनजानी हस्ती से, क्यूँ फिर वो इक दबा सा पैगाम दिया जाती है चुपचाप मेरी रहगुजर में से यूँ गुजरना उसका, देखकर इधर, फिर उधर देखना उसका, कुछ कदम आगे निकलकर फिर रुकना उसका, क्यूँ तकदीर गाम से उसके गाम मिलाती है, कभी जल्दी उठते पीछे से क़दमों की आहट, कभी आगे चलकर साथ चलने की हठ, वो कोन है मैं जान ना पाई आज तक, मगर उसकी खामोस सदा क्यूँ मुझे बुलाती है? हर सुबह और हर शाम की सरगोशियों में, उसका मासूम चेहरा गलियों की दहलीज़ में , दिखता है खुद, या दिखाई दे जाता है, और क्यूँ आँखें उसकी अक्स मुझे मेरा दिखाती हैं?

वस्ल-ऐ-यार

आइनों में झांकते थे तेरी सूरत देखने को बस खुद का चेहरा नज़र आता था आज फिर मेरी आँखों को तेरा अक्स नज़र आया आज फिर उस आसमा का चाँद लजा के शरमाया आज फिर मुद्दत की बाद तेरी आवाज़ सुनी आज फिर बहुत वक़्त के बाद तेरा आगाज़ हुआ आज दोबारा आफताब के ज़र्रे बिखरने लगे आज फिर तेरी दीद ने मुझे ईद का अहसास कराया प्यार के नगमे फिर गूजने लगे फिजा में सारी कायनात गुनगुनाती सुनाई दी आज फिर ये दिल वस्ल-ए-राग गाने लगा आज फिर कोई अपना मेरी जिंदगी में लौट आया ..

किसी मोड़ पे

कई बार भूली सी इक कहानी जिंदगी फिर दोहरा जाती है वो जो गुज़र गयी मंजिल पीछे किसी मोड़ पे फिर टकरा जाती है वक़्त गुजार चुका जिन लोगों को किस्मत फिर कभी मिला जाती है बहुत दूर निकल चुकने के बाद उन्हें फिर लौटा के लाती है साया भी बिछड़ जाता है जब वीरानी रात ऐसी भी कभी आती है वो तो तकदीर कुछ ऐसी है के इक रौ-ए-उम्मीद जला जाती है करूं किस तरह तेरा शुक्रिया के मेरी किस्मत तुझसे बार बार मिलाती है तू चाहे जहाँ जाए मगर फिर भी जिंदगी तुझे मेरे पास, और पास ले आती है...

मेरा घर तेरे शब्दों से भर गया

पानी की तरह तुम्हारे अरमान बरसने लगे ओर कुछ बूंदे ओले बन फर्श पे जमने लगे उनकी ठंडक में मेरा तन बदन सिहर गया मेरा घर तेरे शब्दों से भर गया... हवा की तरह तुम्हारे ख्वाब उड़ने लगे ओर फिर मेरी आँखों में पलने-बदने लगे उनके शीशे में मेरा अक्स और संवर गया मेरा घर तेरे शब्दों से भर गया... खुशबू की तरह तुम्हारे ख्याल महकने लगे निगाहें हम पे क्या पड़ी कदम बहकने लगे और उनके सोज़ में मेरा वजूद जल गया मेरा घर तेरे शब्दों से भर गया... बादल की तरह तुम्हारे अहसास उमड़ने लगे और अंग अंग मेरा वस्ल को तड़पने लगे उस गर्म तासीर में वक़्त तार ढल गया मेरा घर तेरे शब्दों से भर गया..

रीता

कुछ तिनके जोड़े हैं, कुछ गुंजल सुलझाए हैं कुछ सपनो को निचोड़ कर हमने रंग बनाए हैं कई फासले तय करे, कई रास्ते साथ लिए कभी धूप चुराकर, कभी साए थाम लिए थोडी सी कच्ची मिट्टी, थोड़ा सा ठंडा पानी कभी दबी हुई सी हंसी , कभी अश्कों की कहानी कुछ तूफ़ान समेट कर कुछ हवाएं लपेट कर हम रीता के नाम से इस दुनिया में आये हैं.....