कुछ सवाल तेरे लिए

कोई नाजनीन चेहरा आज उदास क्यूँ है,?
बुझी बुझी आँखों में बेदार प्यास क्यूँ है?
अक्स-ए-ख़ुशी थी जो मासूम शक्ल कल तक,
वही नूरे-रू आज बदहवास क्यूँ है?

जिसकी किस्मत दगा दे गई हर मोड़ पर,
वक़्त जिसका ना उम्मीद कर चला
उसके बेकस दिल में अभी भी,
सुलगती आस क्यूँ है?

सदायें दे दे कर बुलाती थी हमें,
शोखी थी जिसकी हर इक सदा में
पुकारा फिर इक बार मुझको आज,
दर्द से भरी लेकिन वो आवाज़ क्यूँ है?

Popular posts from this blog

लम्हें