शुभ प्रभात

कुछ खिली खिली सी धूप है आज
कुछ शबनम बिखर आई फूलों पे
कुछ खुशबू सी उठी है साँसों में
लगता है किसी ने मुड़ के देखा मुझे

वो जो एक साया बनके गुज़रता था
कभी कभी मेरे ख़्वाबों में
तनहा सा, दूर खडा, चुपचाप
लगता है उसी ने आज पुकारा मुझे

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