Wednesday 28 January 2009

Best wishes to u

हर ज़र्रा रौशनी का आपको दिया
हर लम्हा ख़ुशी का आपके नाम किया
दुआओं का सिलसिला यूं ही चलता रहे
तहे दिल से ये आपके दिल को पैगाम दिया
हाँ, मिल नहीं सकते इसका रंज है
इसलिए फासलों से सलाम आपको किया
गर जिंदगी रहे तो इंशाल्लाह एक दिन
आपसे मिलने का वादा सरे-आम किया

करार न था

बाट देखें भी तो कब तक कोई आने का करार न था
बैठें हैं राह में के कहीं वो ये न कहे आज मेरा इंतज़ार न था
सुबह से शाम हो गयी और शाम अब रात में तब्दील हुई जाती है
सोये जब आँखों में नींद तो थी गरचे नींद का खुमार न था
उफक के सभी अख्तर बेसब्र हुए जाते हैं बेचारे
तुम्हारी चाहतों में क्यूँकर उनका शुमार न था

Friday 23 January 2009

बस यूँ ही

क्यूँ वक़्त के मोहताज हैं, क्यूँ किस्मत पे तुम्हें नाज़ है
क्या नहीं किया तुम न सोचो, क्या किया जिसपे ज़माने को ऐतराज़ है

****


लफ्ज़ नहीं मिलते जज़्बात नहीं मिलते
दिल नहीं मिलते खयालात नहीं मिलते
नफरत करना आसान है इस जहां में
मुहब्बत करने के आजकल हालात् नहीं मिलते

*****


एक दाद सुनने को हमने दीवान लिख डाले
अब ये बेनूर आँखें चिरागां हुई जाती हैं

*****

सिर्फ एक चेहरा होता तो सिमट सकता था ख़्वाबों में
यहाँ हर किसी के चेहरे पे कई मुखौटे लगे रहते हैं
परत दर परत खुरच के देखा भी यारों हमने
हर सुहानी सूरत के पीछे डरावने जज़्बात पड़े रहते हैं

Thursday 22 January 2009

एक आम आदमी

हर कमान आज खाली है तेरे तीर से
खामोशी बंध नहीं सकती ज़ंजीर से
रोक नहीं सकते वक़्त-ए-गर्दिशी को
क्या लडेगा कोई भला तकदीर से
जंग जारी है ज़माने भर में आज
हर तरफ इल्जाम हैं संगीन से
मौत की ख्वाइश न कर बाशिंदे तू
मौत भी यहाँ मिलती है तकदीर से ...

Tuesday 13 January 2009

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी एक किताब नही जिसे पड़ लिया और ख़तम हो गई...
ज़िन्दगी एक पुलिंदा है कोरे कागजों का,
जिसका हर पन्ना एक हिकायत का हक़दार है....
इसे जी भर के जियो और अपने तजुर्बे इस पर लिखो....
फिर वोह चाहे अच्छे हो या बुरे....
keep smiling... smiling thru tears make ur eyes glisten like diamonds....


आपकी बातों को फासलों से गुज़र जाने की आदत है
कोई इंतज़ार करे तो किया करे, खैर आपकी बला से

मेरी हिना

मेरी नादानियों को मेहरबानी समझी
या खुदा कितना नासमझ वो शक्स था
बहुत देर तकता रहा जिस पर्दानशीं को
उस नकाब के पीछे मेरा ही अक्स था
रिन्दों की बज्म में बैठा बिन पीये क्यों
क्या कशिश रक्कासा का रक्स था ?
मेरी हिना को अपनी हथेली पे सजाता
बड़ा ही अजीब आशिक वो शक्स था ....