Wednesday 28 January 2009

करार न था

बाट देखें भी तो कब तक कोई आने का करार न था
बैठें हैं राह में के कहीं वो ये न कहे आज मेरा इंतज़ार न था
सुबह से शाम हो गयी और शाम अब रात में तब्दील हुई जाती है
सोये जब आँखों में नींद तो थी गरचे नींद का खुमार न था
उफक के सभी अख्तर बेसब्र हुए जाते हैं बेचारे
तुम्हारी चाहतों में क्यूँकर उनका शुमार न था

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