Wednesday, 23 January, 2013

हम  तो  रकीबों के  ज़ख्मों  को  भी प्यार से सहलाते  रहे 
एक वो जो दोस्त बनके हमारी चोट पर नमक लगाते रहे 

मेरी किस्मत से रंज क्यूँ कर रखते थे वो भला 
जब अपनी लकीरों को खुद वो खुद से उलझाते रहे 

यह जानते थे वो भी के हम जल चुके हैं बिन जले 
फिर क्यूँ गैरों के संग मिलकर हमे सुलगाते रहे 

ज़माने भर के जो दाग सीने में छुपाये थे बरसों से,  
वो महफ़िलों में मेरे उन ज़ख्मों की नुमाइश लगाते रहे

राज़ को राज़ रखना बड़ा  मुश्किल था अगरचे 
हर राज़ को दीवारों पर लिख कर वो सजाते रहे 

हमने अब उस वफ़ा का वास्ता देना छोड़ दिया 
जिस वफ़ा की आड़ में वो हमसे दामन बचाते रहे 
दिल को उम्मीद है शब्-ए-वस्ल कभी तो आएगी
लिल्लाह हिज्र का दिल अब तो मुक्कम्मल कर दे
 
सिलवटें बहुत जोर से चुभती हैं मेरे बिस्तर की 
अब तो मेरे तकिये को उसकी बाजुओं से भर दे 

आँखें बेताब हैं उसकी तीर-ए-नज़र के लिए 
मर्तबा एक उस अश्किया को मेरी नज़र कर दे 

फिर शौक से जान दे देंगे हम क़दमों में 
मेरी जानिब सिर्फ एक बार इतनी मेहर कर दे 

जो बात दिल में दबी है और जुबां तक आती नहीं 
उस खामोशी में मोहब्बत का हर लफ्ज़ भर दे 

मेरे हर अहसास उस के दिल तक पहुँच सके 
खुदाया मेरे दर्द में कुछ ऐसा असर कर दे .......

दिल आशना है तो फिर ये नकाब क्यूँ 
अपने अरमानों पर ऐसा हिजाब क्यूँ ...

जज्बा-ए-मोहब्बत दिल में लिए फिरते हो 
फिर करते हो अपने दर्द का हिसाब क्यूँ... 

पीते नहीं हो यारों की महफ़िल में भी 
ढूंढते हो ज़माने भर में फिर शराब क्यूँ

सायों में घर बनाते हो धूप से बचने को  
मुजरिम बना फिर मासूम आफताब क्यूँ ...

Tuesday, 22 January, 2013


दिल में दबी सभी  यादें हसीं नहीं होतीं 
दिल की सब यादें ग़मगीन भी नहीं होती 
यादें तो गुज़रे वक़्त की परछाईयां  होती है और
परछाईयां कभी कामिल और तस्कीन नहीं होती 

Beta people have rightly name you Damini.... you are nothing less than that.

i am a mother of two young daughters and live in the city of butchers, yes, I live in Delhi. Beta i am pained, hurt, scared for my daughters after what you went through. Every evening till the time they do not come back from their colleges, i am restless and every morning when they leave, i get insecure. I am a working woman and even at office i keep calling them to check to the extent that they think i am a paranoid. But things that happen in this country make all the mothers paranoid.

Beta you are a girl of whom every woman is proud of because of your tolerance and your fighting spirit. I salute your mother who gave birth to you. I want to hug you and tell you that you are the one hope this country has. its because of u, this country is learning to fight. Beta please hold on and come out safely, we all are waiting for you. I cant promise you justice but i can promise you one thing.... and that is, we are with you and will be with you till you get justice. every woman, every girl and most of the boys will be there to take your fight to next level.

मैंने दोस्तों से दोस्ती कर के भी देख ली
मेरे दोस्त अक्सर मुझे भूल जाते हैं
उनसे अच्छे तो मेरे वोह दुश्मन हैं
जो मुझे कोसने मेरी दहलीज़ तक आते हैं ...

फर्क करना दोस्तों और दुश्मनों में
बहु आसान लगता है मुझे आजकल
के दोस्त रिश्ता जोड़ कर दगा देते हैं
दुश्मन बड़ी शिद्दत से दुश्मनी निभाते हैं ...

परदे में दोस्तों को रखना एक फितरत बन गयी है
बात बात पर लोग दोस्तों से नज़र बचाते हैं
वोह तो बस दुश्मन ही होते हैं अज़ीज़ आपके
जो अपना सीना ठोक कर हर राज़ बताते हैं ...

सच बहुत फक्र है मुझे मेरे दुश्मनों पर
कम से कम वो मेरे सीने पर वार करते हैं
उन दोस्तों से भी मगर मुझे कोई गिला नहीं है
जो चेहरे पे हंसी और आस्तीन में खंजर छुपाते हैं ....

जिंदगी का जिंदगी से बड़ा अजीब नाता है
कोई नज़र से दूर होते ही दिल से उतर जाता है
तस्वीरों को ताकें भी तो आखिर कब तक ताकें
भला तस्वीरों से निकल कर कौन बाहर आता है ....

परिंदा पर टूटने पे भी आसमां की तम्मना करता है
और हवाओं में परवाज़ के ख्वाब सजाता है
बेचारा गिर जाता है जब जब कोशिश करता है और
लाचारी से वो अक्सर क़दमों पे भी लडखडाता है

दुःख बांटने से घटते और सुख बांटने से बड़ते हैं
फिर भी इंसान दूसरों को दुःख देकर सूकून पाता है
मगर तब उसकी हंसी खो सी जाती है
जब ख़ुशी के लम्हों में खुद को तनहा पाता है

बहुत गहरा राज़ छुपा है जीवन के सागर में
कोई पार कर के डूबता है कोई डूब कर पार पाता है
तूफानों से टकराकर भी कई सफीने साहिल पे आते हैं
कभी शांत समंदर भी किनारे पे खडा बेड़ा डुबाता है ....



वो हमसे हमारी बेवफाई क सबब पूछते हैं
हमने कहा वफ़ा तो सांस भी जिंदगी से नहीं करती
बड़ा अजीब सा दस्तूर हैंइस जहां में जीने का
के यहाँआती हुई मौत जिंदगी से नहीं डरती।।।

तुम रस्मे वफ़ा की कसमे खाते हो बेवजह
कसम, सच, किसी का पेट नहीं भरती
जब तक साथ मिलता है निभाते क्यूँ नहीं
क्या तुम्हें अपनी जिद कभी नहीं अखरती ???

हम से उम्मीद रखते हो और हमसे ही गिला
और हम ही से होकर तुम्हारी राह गुज़रती
उसपर नाराजगी ऐसी के सबसे कहते हो
वो अब तक जिंदा क्यूँ है, आखिर क्यूँ नहीं मरती ........


duaon ka silsila jo chala chalta gaya
ke har dua mein uski ka naam aaya hai
kafan ki ab shaayad zaroorat nahi pade
ke maut ke saayon me zindgi ko paya hai
uthi jo aawaaz dekho dheemi na pade
har haath ne har haath se haath milaya hai
ek ladki jo ladi to duniya ladne nikal padi
is thand mein logon ko garam josh aaya hai
jo zid hukumat ki to zid aawaam ki bhi hai
tyaar raho ke imtehaano ka waqt aaya hai
nikal kar dekh to kitna shor hai gali gali
ab jaug jeet lenge ke jeet ka mausam aaya hai
bus rukna nahi jhukna nahi date rahne hai ke
is taakat pe hukumraanon ne bhi sar jhukaya hai...