Friday 24 June 2011

paigaam aata hai, paigaam bhej dete hein,
ek ek rukka unka yaadon mein sahej lete hein...

ye zaroori toh nahin ke hum hi unhen pukaara karen
kabhi kisi roz unse bhi aawaaz ki ummeed rakhte hein
ab yeh unki adaa hai, masroofiyat hai ya beparwaahi
hum aaj tak na samajh sake ke wo aise kyun karte hein...

Saturday 18 June 2011

सब कुछ छोड़ दिया नई जिंदगी की तलाश में


बहुत देर बाद दिल को सुकून नसीब हुआ


जिंदगी की सुबह बिछड़े थे, जिंदगी की शाम को मुलाक़ात हुई
बहुत अरसा बीत गया दरमयां, बहुत मुद्दत के बाद उनसे बात हुई
मासूमियत की जो पल साथ बिताये थे,
हम तो अपनी मिलकियत समझ साथ ले आये थे
हमने बहुत मौसम देखे उन दिनों
मगर न जान सके उनकी जिंदगी में कितनी बरसात हुई
सब्र किया बरस दर बरस
और दिल ही दिल में गुफ्तगू होती रही
हमारा क्या हम तो तभी उनके हो गए थे
उनकी बीती हुई हर रात चाहे किसी और की सौगात हुई
अब भी जो मिलीं तो परछाईयां मिलीं
और परछाईयां पकड़ी नहीं जातीं
हम ख्वाब और हकीक़त में फर्क भुला बैठे थे
जब ख्वाब टूटा तो अपनी ही हालत दर्दनाक हुई

Tuesday 14 June 2011

zindgi safar nahi, rahguzar nahi manzil bhi nahi
zindgi sirf kuch kar guzarne kaam naam hai
apne liye to har koi jee leta hai yahan par
kisi aur ke liya jeena shaayad sabse badaa kaam hai

zindgi

Thursday 9 June 2011

प्यार की दीवानगी इंसान को खुदा बना देती है
वरना कौन है जो ऐसे इस्तकबाल के काबिल है
इस जहां में अब एक भी इंसान नहीं मिलता
बस इक भीड़ है और भीड़ में खुदा का मिलना मुश्किल है

हमारा क्या हम तो बुतपरस्ती को मजबूर हैं
खुदा के करीब, लेकिन खुद से बहुत दूर हैं
अपने जैसा एक दीवाना ढूढ़ते हैं दोस्तों में
जो मेरी तरह दिलशाद है मेरे जैसा आदिल है

जो चुप नहीं रहते, वो बगावत करते हैं
और उन्हें ही आदतन तवज्जो दी जाती है
हैरान है दिल ये देखकर के ज़माने में
कामयाब वो हाथ है जो दस्त-ए-कातिल है....

जो दबा लेते हैं दर्द-ओ- जज़्बात यहाँ
और मुस्कुराकर हर गम भुला देते हैं
यहाँ ना-शऊर ही समझा जाता है उन्हें
बेशक वो ज़माने के बेहतरीन फ़ाज़िल हैं ....

मत छोड़ो जो तुम्हारा है, छीन लो या तबाह कर दो
इस दुनिया का दस्तूर यही रह गया है
खंजर सब आस्तीन में छुपाये बैठे हैं
कटते वो मासूम हैं जो इस फितरत से गाफिल हैं

Sunday 5 June 2011

raat ko alvida kahne ka jigar rakhte hein, din ko thaamne ka hausla bhi,
mere humdard gar mera saath deta rahe, waqt ko hi muththi mein bheench lein
abhi toh sirf ye mere junoon ka aaghaaz hai,
us par mera josh be-andaazah hai,
apne hausle ke pankh aazmaa rahe hein,
magar mere paron ki himmat teri parwaaz hein
zindgi kisi ki bhi mukkammal nahin hoti,
har shaks kuch adhoora sa rah jaata hai,
uski shafaqat par chodd de apni sab shikan
aur dekh kab tak tera muhaafiz tujhe sataata hai..

mukkammal - complete
shafaqat - mercy, raham
shikan - tension
muhaafiz - guardian, protector
musaafir hein, beet jaayenge raahon ke saath
har mod par lekin rahbar badal jaata hai
koi meel do meel saath chalta hai saath nibhane ko
koi kadam do kadam chalkar saath chodd jata hai
manzil ka manzar tak dikhta nahin,
bus dhool ka ek badaa sa gubaar nazar aata hai
gumshuda ho gaye hein khud ka pataa poochte hue
har koi har baar mukhtalif raasta bataata hai...

kal ki baat chodd do, yahan aaj ka bhi aasraa nahi,
waqt kab naam-nishaan banaata hai, mitaa deta hai

Friday 3 June 2011

हाथ बिलकुल खाली हैं मगर दिल भरा है
किसी का ख्याल अब तक मेरे ज़हन में खड़ा है
देख कर खुदा की मेहरबानी उसका करम भूल गए
के सर उसके सजदे में झुकने को अड़ा है
क्या कोई इंसान बुतपरस्ती के काबिल है
क्या कोई इंसान सचमुच इतना बड़ा है
हर तरफ से मायूसी झांकती थी हर सुबह
उसकी नवाजिश हुई तो ख़ुशी से दिल रो पड़ा है
बुझा देता था चिरागों को रात रात भर जलाकर
बहुत देर तक ये दिल अकेला अंधेरों से लड़ा है

Wednesday 1 June 2011

मिटा के ख़ाक कर दो कोई शिकायत नहीं
बस मेरे वजूद पर मुझे शर्मिंदा मत करवाओ
बहुत जान है अभी भी दौड़ती मेरी रगों में
लहू बहा दो गरचे अरमां मत जलाओ
बड़ी सख्त रूह है बड़ा सख्त जिस्म है
तेरे सितम मुझे सर झुका के कबूल हैं
सता लो जब तक जी न भरे कातिल मेरे
मुलायम सपनो को आँखों से न चुराओ
हर सांस लेने से पहले गर पूछना पड़े
तो एक एक सांस सीने में भारी लगे
छीन लो हर सांस मेरी कोई शिकवा नहीं
बस मेरी जीने की उम्मीदों को न मिटाओ