Tuesday 22 January 2013


वो हमसे हमारी बेवफाई क सबब पूछते हैं
हमने कहा वफ़ा तो सांस भी जिंदगी से नहीं करती
बड़ा अजीब सा दस्तूर हैंइस जहां में जीने का
के यहाँआती हुई मौत जिंदगी से नहीं डरती।।।

तुम रस्मे वफ़ा की कसमे खाते हो बेवजह
कसम, सच, किसी का पेट नहीं भरती
जब तक साथ मिलता है निभाते क्यूँ नहीं
क्या तुम्हें अपनी जिद कभी नहीं अखरती ???

हम से उम्मीद रखते हो और हमसे ही गिला
और हम ही से होकर तुम्हारी राह गुज़रती
उसपर नाराजगी ऐसी के सबसे कहते हो
वो अब तक जिंदा क्यूँ है, आखिर क्यूँ नहीं मरती ........

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