Tuesday 22 January 2013


मैंने दोस्तों से दोस्ती कर के भी देख ली
मेरे दोस्त अक्सर मुझे भूल जाते हैं
उनसे अच्छे तो मेरे वोह दुश्मन हैं
जो मुझे कोसने मेरी दहलीज़ तक आते हैं ...

फर्क करना दोस्तों और दुश्मनों में
बहु आसान लगता है मुझे आजकल
के दोस्त रिश्ता जोड़ कर दगा देते हैं
दुश्मन बड़ी शिद्दत से दुश्मनी निभाते हैं ...

परदे में दोस्तों को रखना एक फितरत बन गयी है
बात बात पर लोग दोस्तों से नज़र बचाते हैं
वोह तो बस दुश्मन ही होते हैं अज़ीज़ आपके
जो अपना सीना ठोक कर हर राज़ बताते हैं ...

सच बहुत फक्र है मुझे मेरे दुश्मनों पर
कम से कम वो मेरे सीने पर वार करते हैं
उन दोस्तों से भी मगर मुझे कोई गिला नहीं है
जो चेहरे पे हंसी और आस्तीन में खंजर छुपाते हैं ....

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