Sunday 29 April 2012


हमसाया नहीं, हमदर्द नहीं हमकदम भी नहीं बन सका
बस एक ही रिश्ता है अब उससे  हमज़मानी का
रहबरी की उम्मीद थी तो राहें तकते थे हर रोज़ जिसकी
बुत परस्ती सिखाने वाला वो कायल था बुत शिकानी का
दिल-ए-मासूम को यहाँ के रस्मों -रिवाजों से आशनाई न थी,
और उस आशना को शौक था ज़माने भर से बदगुमानी का
हमने जिन मरासिमओं पर जिंदगी गुज़ार दी अपनी
अब उनसे क्या शिकवा करें तोहफा ए नातवानी का


हमसाया - neighbour, हमदर्द - sympathizer, हमकदम - one who walks with u
हमज़मानी - staying in the same era,
रहबरी - guidance,
बुत परस्ती - worshipper of statue, कायल - follower, बुत शिकानी - one who breaks stutues
आशनाई - friendship, आशना - friend, बदगुमानी - suspicious
मरासिमओं - agreements, तोहफा ए नातवानी - gift of sarrows

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