Tuesday 3 February 2009

मुजस्मा

उनका मुजस्मा मेरे ज़हन में इस कदर छाया हुआ है
के हर रंग मोहब्बत के बेहतरीन रंगों से नहाया हुआ है
वो कहते हैं के दूर हो जाएँ हम उनसे, बहुत दूर मगर
यहाँ एक चेहरा मासूम सा इन नज़रों में समाया हुआ है

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आपकी खामोशी की आवाज़ तहेदिल तक पहुँच गयी
अब तक एक गूँज अरमान जगह रही है बेलौस....
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ये हारने ये जीतने की बातें नागवार हैं मुझे
जिंदगी की जंग में किसको क्या हासिल हुआ
जो जीत गया दिलों को खुद का दिल हार कर
तुम्हीं बताओ वो किस ईनाम के काबिल हुआ
हर रहगुज़र पे बिछे हैं बेशुमार खार यहाँ, और
हर शख्स खुद के अरमानो का कातिल हुआ
मुझको आइना दिखाकर अपनी सुरत छुपा ली
मेरे लिए अब तू गुनाहगारों की कतार में शामिल हुआ

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