Wednesday 15 October 2008

एक लड़का

एक नटखट लड़का है कहीं पर
जो गीत चुनता है
अपने लफ्जों में ना जाने
कितने ख्वाब बुनता है

उसकी कलम में एक जादू है
और हाथों में एक तिशनगी
जाने क्या कुछ कह जाता है
जाने क्या कुछ सुनता है

कभी कभी एक खामोश आवाज़ देता है
कभी कभी जोर से फिर चुप हो जाता है
उस शख्स का क्या कहना जो
खारों से गुलाब चुनता है

निगाहें भी बयानी से कभी
बाज़ नही आती उसकी
तस्वीरों में से भी यू लगे
मेरे दिल की सब बातें सुनता है

मुझ पे अपने शब्दों की
एक खूबसूरत से ओदनी डालता है
न जाने कहाँ से वो इतनी
रेशमी गज़लें बुनता है

5 comments:

  1. Simplicity mein adbhut shakti hai- seems true about this poem.

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  2. एक लड़का गीत चुनता है.......यह ख्याल ही एक सुर है,
    जिसने मुझे बाँध लिया........बहुत अच्छा लिखती है आप

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  3. ""हाथों में एक तिश्नगी है ""इस पर पुन विचार करने की कृपा करें

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  4. ""हाथों में एक तिश्नगी है ""इस पर पुन विचार करने की कृपा करें

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  5. बहुत सुंदर कविता हैं... पड़ कर बहुत अच्छा लगा... कृप्या कोई परिवर्तन ना करें... its perfect.... thank u so much..

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