Wednesday 22 October 2008

हमारी याद आती होगी

कभी तो हमारी याद आती होगी
कभी तो रात को बेताबी सताती होगी
कभी तो माजी टोकता होगा
कभी तो आँख रुलाती होगी ...

कभी तो सावन की झरी में
फिर अरमान मचलते होंगे
कभी तो खिज़ा में
पत्तों के साथ आंसू झड़ते होंगे
कभी तो सर्द रातों में
हमारी कशिश जगाती होगी
कभी तो हमारी साँसों की गर्मी
जिस्म आपका पिघलाती होगी...

कभी तो दीदार की तमन्ना में
पाँव छत तक ले जाते होंगे
कभी तो मिलने की तड़प में
ख्वाब हमारे आते होंगे
कभी तो हमे फिर छूने की चाह
हाथों को तरसाती होगी
कभी तो शाम को पांच बजे
घड़ी की टिक टिक सुनाती होगी

कभी तो दिन ढले
बीते पल बुलाते होंगे
कभी गुज़रते हुए पुराने रस्ते
फिर आवाज़ लगाते होंगे
कभी तो बाहें हमे आगोश में भरने को
फिर मचल मचल जाती होंगी
कभी तो तनहाइयों में
हमारी याद आती होगी....

2 comments:

  1. bahut sunder
    may i say
    silence of love
    described is it so
    regards

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  2. you have the knack of touching heart, soul and mind with your words...unique and brilliant...

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