Thursday 23 October 2008

मेरा तार्रुफ़

मैं वो हवा हूँ जो हमेशा बहती है
मैं वो घटा हूँ जो बरसती रहती है
मेरी साँसों की खुशबू से महकते ही सारी फिजा
मेरी धरकन से वक़्त की रवायत चलती है
मेरी तबस्सुम को तरसते हैं गुल -ओ -गुलज़ार ,
मेरे तसव्वुर से हूर -ए -जन्नत जलती है
मुझसे सुबह होती है , मुझसे शाम ढलती है ...

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