Thursday 16 October 2008

Hurricane rita

कुछ तिनके जोड़े हैं, कुछ गुंजल सुलझाए हैं
कुछ सपनो को निचोड़ कर हमने रंग बनाए हैं
कई फासले तय करे, कई रास्ते साथ लिए
कभी धूप चुराकर, कभी साए थाम लिए
थोडी सी कच्ची मिट्टी, थोड़ा सा ठंडा पानी
कभी दबी हुई सी हंसी , कभी अश्कों की कहानी
कुछ तूफ़ान समेट कर कुछ हवाएं लपेट कर
हम रीता के नाम से इस दुनिया में आये हैं.....
*****


मेरी परवाज़ का अंदाज़ आप यूँ भी लगा सकते हैं
के मेरे पंखों में सबा का ठिकाना है
जो असमाँ में उडू तो उसको भी झुका दूं
के तारों के पार मेरा आशियाना है

2 comments:

  1. अद्भुत गति,अद्भुत अंदाज....
    हाँ मैंने महसूस किया .......
    उड़ान भरने की अलौकिक क्षमता है,
    शब्दों में गजब का प्रवाह है,बहुत सुन्दर....

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  2. हाँ मैंने भी महसूस किया हैं...
    रिता.. इस से ज्यादा अपना ख़ुद का सच्चा आकलन कोई नही कर सकता जेसा तुमने किया हैं... तुम बुल्कुल इसी ही हो...
    Two of your most perfect poems...
    You are really a hurricane Rita...
    Thanks...

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