Friday 17 October 2008

तेरा साया

किसी को कैसे बताएं
तब क्या क्या होता है
जब रात के अँधेरे में
आसमान में चाँद तनहा होता है...

जब हरसिंगार खिलते हैं
जब हवा बहती है
जब मेरा एक ख्वाब
तेरे ख़्वाबों में आकर सोता है…

जब अपने घर के
बाम पर तू खड़ा
मेरे झरोखे की तरफ
चुपके से झाँक रहा होता है…

जब सबा के साथ
खुशबू तेरी आती है
जब सारा आलम मद मस्त सा
तेरे बदन सा महक रहा होता है…

तब तेरा मासूम चेहरा
तेरी आँखें, तेरी साँसे
तेरा साया और तू
मेरे पास कहीं खड़ा होता है

3 comments:

  1. good compostion
    tera saya
    regards

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  2. एहसासों को शब्द देना इतना आसान कहाँ....
    पर ना कहके भी बहुत कुछ कह गई भावनाएं

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  3. बहुत बहुत सुंदर कविता... कुछ बहुत नाजुक भावनाओं को शब्दों का जामा पहनाया हैं आपने... keep it up.. thanks

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