Monday 27 October 2008

सब तकदीरों की कहानियां ऐसी नहीं होती

न हिज्र का गिला
न वस्ल की इल्तजा
सब रिश्तों की बुनियाद
ऐसी नहीं होती....

आगोश में जन्नत हो
या दूरियों में दोज़ख
हर मोहब्बत की इन्तहा
ऐसी नहीं होती...

नज़र-नज़र में गुफ्तगू
सरे आम या तन्हाई में
सबकी चाहत- ए- बयान
ऐसी नहीं होती...

रुसवाइयां नीवं हो जिसकी
बदनाम करें महबूब को
चाहत-ए पाकीज़ की निशानियाँ
ऐसी नहीं होती...

परवान चढ़ जाए जो मोहब्बत
और खुशगवार भी हो
सब तकदीरों की कहानियां
ऐसी नहीं होती....

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