Tuesday, 25 November, 2008

सब्र

सब्र की मियाद ख़तम होने को है शायद
कहीं से रुक्सती का एक पैगाम आया है
राहों में दरख्त फिर से हरे हो गए अब, के
एक हवा का झोंका उनके आने का संदेस लाया है

*****
यादें शब् भर शम्मा बन जाने की ख्वाइश रखती हैं
एक परवाना ही नहीं मिलता जो खुद जला सके


******
इस कदर उसने इतरा के मेरी तारीफ़ की एक दिन
हर हर्फ़ मेरे सफ्हे का मुक्कम्मल हो गया

*****
इस रंगत की शोखियों पर उनकी नज़रों की शरारत
एक घड़ी में एक जिंदगी बिता दी यूँ ही तकते तकते ...

2 comments:

  1. अत्यधिक सुंदर शेर /पेड़ों के हरे भरे होने से आने का पैगाम सुंदर कल्पना /सब्र की म्याद और रुखसती का पैगाम /एक घड़ी में एक जिंदगी बिताना सुंदर अभिव्यक्ति /जहाँ तक परवाने की शमा में जलने की बात है हम लोग ग़लत फ़हमी पाले हुए है =वह जलने नहीं आता वल्कि शमा बुझाने आता है -क्योंकि उसे रात का अंधियारा पसंद होता है उल्लू की तरह

    ReplyDelete