Thursday 27 November 2008

रात की बातें

बस थक गए अब तेरे ख़त के इंतज़ार में
कुसूर तेरा या नामाबर का अल्लाह जाने...
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आपकी दोस्ती सर आँखों पे ए दोस्त मेरे
यहाँ लोग कम हैं जो यूँ फ़र्ज़ निभातें हैं
इन्तेहा-ए-जुर्म खुद करते हैं ज़माने भर में
हम बेकसूरों पे सरेआम इल्जाम लगाते हैं
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तेरी रुसवाइयों के सदके मेरी बदनामियाँ हुई
अब खौफज़दा तू क्यूँकर होता है दीवाने मेरे ...
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हर लफ्ज़ में एक ही बात कहे जाते हैं वो
बस शिकायत, और शिकायत, एक और शिकायत
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अब रात की बातें रातों पे छोड़ कर
लो हम चल पड़े एक सुबह की तलाश में...

1 comment:

  1. मैंने मरने के लिए रिश्वत ली है ,मरने के लिए घूस ली है ????
    ๑۩۞۩๑वन्दना
    शब्दों की๑۩۞۩๑

    आप पढना और ये बात लोगो तक पहुंचानी जरुरी है ,,,,,
    उन सैनिकों के साहस के लिए बलिदान और समर्पण के लिए देश की हमारी रक्षा के लिए जो बिना किसी स्वार्थ से बिना मतलब के हमारे लिए जान तक दे देते हैं
    अक्षय-मन

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