Friday 28 November 2008

कुसूर

हद है,कुसूर भी माना उन्होंने
कुछ अकड़ के कुछ बिगड़ के ....

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कोई दर्द में हुआ हो तो हुआ करे
उन्हें अपनी बेपरवाही पे गुरुर है
देख कर एक नज़र उधर देखते हैं
जाने उधर किस शय में क्या सुरूर है ???

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हर बात पे तोहमत लगाते हैं
हर बात पे टोकते जाते हैं
मेरे हबीब हैं वो खुदाया
फिर क्योंकर दुश्मनी निभाते हैं ?

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मेरे चाहनेवालों की फेहरिस्त में आज फिर एक नाम जुड़ गया
उनकी आशिकी का दम भरते थे कभी आज वो दामन फैलाए खड़े हैं

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