Monday 21 May 2012


बहुत  सुनसान है  ये दयार, यहाँ क्यूँ कोई आता जाता नहीं 
क्यूँ  इस  घर का किसी अपने से कोई नाता नहीं ...
बड़ी ही कोशिशों से किसी ने तो इस घर को बनाया होगा 
जिसके दर- ओ-दीवार को कोई अपने लफ़्ज़ों से अब सजाता नहीं ...

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