Wednesday 17 September 2008

ख्वाब

जो दिल में रहे उसे ढूंढें क्यूँकर
जिसका ठिकाना ही मेरा मकान है
वो बात दूसरी है के उनका यहाँ से गुज़रना,
बेशक मेरी जिंदगी पे एक अहसान है


कांच के ख़्वाबों को आँखों में ही रहने दो
कहीं गिर गए तो टूट जायेगे
भला ख्वाब टूट गए तो बताईयें
क्या आप बे-ख्वाब जी पायेंगे????


क्यों मुझसे वो पता पूछते हैं मेरा
जब उनके पहलू में वक़्त बिताया जाता है
खुद को खुद की खबर तक नहीं होती
जब उनका चेहरा सामने आता है


याद का कोई कसूर नहीं, के जब तब आ जाती है,
ये उसके दीदार की ख्वाइश है जो हर वक़्त सताती है,
रूबरू होना तो मुमकिन नहीं मगर,
एक सूरत है जो ज़हन में अक्सर छा जाती है....


अब भी तेरे इंतज़ार में कोई है,
अभी शायद तुझको उसका ख्याल आया है
ज़रा दरवाजा खोल के देख,
ठंडी हवा झोंका उसका पैगाम लाया है


हर रोज़ एक हिकायत लिखते हैं दर्द-ए-जुदाई की
हर रोज़ फिर उसको मिटा देते हें,
तेरे तसव्वुर की तपिश में जलते हैं और
हर रोज़ एक नया गम गले लगा लेते हैं

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