Friday, 19 September, 2008

तेरी याद आई

फिर रात की तनहाई
फिर तेरी जुदाई
फिर रुका हुआ सा वक़्त
फिर बारिश ने आग लगाईं
फिर एक उदासी चांद की
सारे आसमान पे छाई
अब ऐसे मौसम में
फिर बेदर्दी तेरी याद आई

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