Wednesday 10 September 2008

यादें

तुझको भूलना मेरे बस में नही लेकिन
तुझे याद कर के भी जीया नहीं जाता
तेरी यादों के गम में पी लेते हैं
के शादमानी में अब पीया नहीं जाता

अपनी जिद की बात छोड़ दे ए सनम मेरे
यहाँ ज़िन्दगी को शर्तों पे जीया नहीं जाता
अब ये सवाल पूछा तो टूट जायेगा दिल मेरा
के हर बार चाक दामन सीया नहीं जाता

6 comments:

  1. ek ek lafz behtrin hai..
    kya karun tarif ke liye shbd nahin mil rahe hain....
    jari rahe rita ji...

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  2. "तुझ को भूलना मेरे वश में नहीं है!"

    वाह क्या बात है!!



    -- शास्त्री जे सी फिलिप

    -- हिन्दी चिट्ठा संसार को अंतर्जाल पर एक बडी शक्ति बनाने के लिये हरेक के सहयोग की जरूरत है. आईये, आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!! (सारथी: http://www.Sarathi.info)

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  3. ये केवल कुछ पंक्तियाँ ही नही हैं.....इसमे सुंदर भाव भी दिख रहे हैं ......बहुत सुंदर

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  4. NICE
    अपनी जिद की बात छोड़ दे ए सनम मेरे
    यहाँ ज़िन्दगी को शर्तों पे जीया नहीं जाता

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  5. चाक दामन सिया नहीं जाता...
    सच है, सच है.

    लिखती रहें...
    आज भी आपका है ..
    कल तो है ही..

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  6. jis dil pe gujre woh hi janta hai..
    beautiful words...dont stop writing...

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