Thursday 28 August 2008

Against the paintings of Hindu gods - M.F. Hussain

ये लोग जो दिलों को बांटने का काम करते हैं
के अपनी तस्वीरों में खुदा को बदनाम करते हैं
क्या उनका खुदा हमारे खुदा से अलग है
गर नही तो ये क्यों ऐसा अंजाम करते हैं

किसी शख्स की सूरत मज़हब नहीं बनता
है कौन सा धरम जो नफरत को है सिखाता
ये चन्द लोग परदे को बेपर्दा सरे आम करते हैं
कुछ लोग जो दिलों को बांटने का काम करते हैं

क्या उसका वजूद मेरे वजूद से इतना जुदा है?
क्या हिजाब में सजता सिर्फ उसका खुदा है?
क्यों फिर हमारी बेटियों को वस्त्रहीन सुबह शाम करते हैं
ये चन्द लोग जो दिलों को बांटने का काम करते हैं

तुम हिन्दू हो तो काफिर हो हम मुस्लिम है हम काबिल हैं
तुम दोज़ख के हक़दार हो हम जन्नत के हासिल हैं
ऐसे शैतानी इरादों को चलो हम नाकाम करते हैं
इन चन्द लोगों को बेनकाब चलो सरे आम करते हैं

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