Friday, 29 August, 2008

हर सुबह तेरा ख्याल आता है....

मुद्दत हो गयी है तेरा दीदार किये
फिर भी हर शब तेरा चेहरा जगाता है
हर लम्हा तुझसे वाबस्ता है
हर सुबह तेरा ख्याल आता है

ये ज़िन्दगी रुक सी गयी है तेरे बिन
आईने अब भी तेरा अक्स दिखाता है
मेरे वजूद के हर पहलू में
आज तक तेरा साया झिलमिलाता है

न लौट कर आती है कभी उम्मीद मेरी
मगर दिल ना-मुक्कमल इंतज़ार कराता है
हर गोश में मेरे ख्वाब्गार के
सिर्फ तेरा सपना समाता है

कोई वादा नहीं किया कभी तूने, लेकिन
किसी यकीं पे अब भी वक़्त आस लगाता है
सद् कोशिशों के बावजूद जाने क्यों
भूल कर भी हर रोज़ तू याद आता है

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