Tuesday 26 August 2008

यादें

वो बातें जो तुम से वाबस्ता थी
आज यादें बन की सताती हैं,
तुम्हारी कुछ यादें हँसाती हैं,
और कुछ तड़पाती हैं, रुलाती हैं....

वो बातें गुज़रे लम्हों के साथ ,
पल पल इन लम्हों में घुल जाती हैं ,
और इन पलों , में उन पलों की खुशबू ,
समेट कर मेरे बदन पे छोड़ जाती हैं ...

कुछ परछाईयाँ, उलझी हुई सी
मेरे सायों में तुम्हारा अक्स दिखाती हैं ...
और तस्सवुर में तेरी तस्वीरें
तब रह रह के उभर आती हैं ...

इतने से भी गर चैन न पड़े
तो रूह मौसम बन जाती है
तब आसमा से बारिश की तरह
ये ऑंखें आसू बरसाती हैं ..

ये यादें किसी दिल ओ जानम के
चले जाने के बाद आती हैं

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