Wednesday 27 August 2008

तुमहारे हाथों की हरारत

तुमहारे हाथों की हरारत,
तुम्हारी आँखों की शरारत,
और उस पे मुकुराना,
क्या क्या बिसराऊँ कि...
नींद आ जाए....

तुमहारे देखने का तरीका,
हाथ पकड़ने का सलीका
ओइर उसपे एकटक देखते जाना,
और क्या क्या बिसराऊँ कि...
नींद आ जाए....

तुमहारे छूने का अंदाज़,
उँगलियाँ चूमने का अंदाज़,
और उस पे चुप लगाना,
क्या क्या बिसराऊं कि...
नींद आ जाए....

1 comment:

  1. तुमहारे हाथों की हरारत,
    तुम्हारी आँखों की शरारत,
    और उस पे मुकुराना,
    क्या क्या बिसराऊँ कि...
    नींद आ जाए....

    aur main so jauuuuuuuuuuuuu

    keep it up

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