Friday, 29 August, 2008

दूरी

बस, अब ओर सहा नहीं जाता
तेरे बिन तनहा रहा नहीं जाता
तुझ तक पहुँचना मुमकिन नहीं
मगर तुझे लौटने को कहा नहीं जाता

वो चाँद तुझसे ज्यादा करीब है
तेरी दूरियों का उसको भी अहसास है
उसकी चांदनी मेरा दर्द समझती है
वरना उसका डोला हर रात नहीं आता

1 comment:

  1. so closly shows a anguish of a lover... जेसे हर शब्द करह रह हैं.... बहुत सुंदर कविता रीटा..

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