Thursday, 28 August, 2008

हम जीना भूल जाते हैं?

जिंदगी में गम सौ बार आते हैं
मगर क्या हम जीना भूल जाते हैं?
जीया न जाए, तो भी जीना पड़ता है
जी कर ही हम गमों से निजात पाते हैं...
कौन कहता है के हँसना आसान है
लेकिन लोग यहाँ आंसुओं को भी हंसी में छुपाते हैं
सबको यहाँ सब कुछ नहीं मिलता मगर
फिर भी लोग पाने की उम्मीद पे जीए जाते हैं
ये ज़रूरी तो नहीं के सबको प्यार मिले इस जहान में
कुछ लोग यहाँ बिन प्यार के भी उम्र बिताते हैं
ए दोस्त मेरे, न कर गम, न आंसू बहा
के हम जैसे लोग गुमो में भी मुस्कुरातें हैं

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