Wednesday, 27 August, 2008

इक खोया हुआ खवाब

कुछ ख्वाब रख छोड़ थे आँखों में,
हश्र उनका देखो क्या हुआ?
इक गुम हो गया भीड़ में कहीं,
इक अश्कों के साथ बह गया...

तेरे साथ बैठकर पिरोया था जो.
सपना वो टूटा और बिखर गया,
और इक नन्हा सा मासूम खवाब
आँख के किसी कोने में रह गया...

टीस उठती है जब कभी,
दर्द दिल में होता है,
उस खवाब का क्या करें,
जो दर्द सारा सह गया....

छुपाया था बहुत उनसे ,
गुजरी थी जो अपने पे,
पर इक खवाब हाल मेरा,
बेहाल होके कह गया...

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