Wednesday, 27 August, 2008

तुम लौट आओ....

मेरी ज़िन्दगी बिन तेरे,
आधी अधूरी इक किताब,
इक सफे पे अपना नाम,
लिखकर इसे पूरा भर दो

मेरी ज़िन्दगी बिन तेरे,
टूटा हुआ सा इक खवाब,
आके नींदों में मेरी,
ख्वाब मेरा पूरा कर दो

मेरी ज़िन्दगी बिन तेरे,
बिना सुरूर की शराब,
पीके संग मेरे इक जाम
साकी को तुम खुश कर दो

मेरी ज़िन्दगी बिन तेरे
मुझ पर पड़ा हिजाब,
उठा के इस चिलमन को,
दामन मेरा आज भर दो

मेरी ज़िन्दगी बिन तेरे,
इक उखड़ा हुआ जवाब,
सवालों के सुलझा के,
सारे गुंजल सीधे कर दो.

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