Wednesday, 27 August, 2008

इंसान नहीं बदलता ....

कभी एक रात का साथ ज़िन्दगी भर नहीं चलता
हवाओं के रुख शद बदले मौसम नहीं बदलता
न ख्वाईशें होती हैं कभी, न आरजू ख़तम
हवस इंसान की फितरत है, इंसान नहीं बदलता

तूफ़ान थम भी जाए, साहिल पनाह नहीं देता
किश्ती डूबने पे नाखुदा, खुद पे गुनाह नहीं लेता
हर शख्स भूखा है, भूख का अरमान नहीं बदलता
के हवस इंसान की फितरत है, इंसान नहीं बदलता

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