Wednesday 27 August 2008

वक़्त-ए-रुक्सती

तेरी तस्वीर आखों में बसा लूं
फिर यहाँ से चला जाउंगा
अपनी तकदीर की लकीरें मिटा लूं
फिर यहाँ से चला जाउंगा

भूल जाने की कोशिशे तुझको,
मुझको दीवाना न बना दे,
इसलिए तेरी याद यहीं दफना लूं
फिर यहाँ से चला जाउंगा

फिर हँसे साथ हम तुम,
ये मंजूर न जालिम ज़माने को,
अपने साथ तुझे भी रुला लूं,
फिर यहाँ से चला जाउंगा

बांटी थी तुझसे सिर्फ बहारें मैंने ,
और समेटे सारे पतझड़ अकेले,
अपने वो दर्द तुझको दिखा लूँ
फिर यहाँ से चला जाउंगा

तुझको चाह के कुफ्र किया,
बुत-ए-अरमान बना के पूजा
अपने उस जुर्म की सजा पा लूं
फिर यहाँ से चला जाउंगा

फूल दिया था तुने कभी,
उसके कांटो की चुभन अब भी है,
वो सोगात दिल से छुपा लूं
फिर यहाँ से चला जाउंगा

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