Wednesday, 27 August, 2008

शुभ प्रभात

कुछ खिली खिली सी धूप है आज
कुछ शबनम बिखर आई फूलों पे
कुछ खुशबू सी उठी है साँसों में
लगता है किसी ने मुड़ के देखा मुझे

वो जो एक साया बनके गुज़रता था
कभी कभी मेरे ख़्वाबों में
तनहा सा, दूर खडा, चुपचाप
लगता है उसी ने आज पुकारा मुझे

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