Tuesday 26 August 2008

अब हम क्या करें

कुछ और करने के काबिल रहे नहीं
तुझसे प्यार भी न करें तो अब क्या करें?
होंठों पे लगी चुप तेरे कहने पे
नज़र-ए-इकरार न करें, तो अब क्या करें?

दस्तूर गर बदल सकते रवायतें मोहब्बत का,
तो सदियों पहले बदल चुके होते...
कहते हो, के न चाहें तुम्हें इस कदर,
तो तुझसे तकरार न करें, तो अब क्या करें?

तेरे साथ जीने की आरजू में,
कई जनम गवां बैठें हैं तनहा-तनहा
इस जिंदगी में भी तू छुडाये दामन,
फिर मौत का इंतज़ार न करें, तो अब क्या करें?

तुझे भुलाने की कोशिशें बेकार गयीं
यादें झांकती हैं झरोखों से, रात भर
अकेले में आ आकर बहलाती हैं इसलिए,
नींदें अपनी खराब न करें, तो अब क्या करें?

न बाद -ए -नसीम, न खुशनुमा पल
मेरी जिंदगी में किसी की जगह नहीं
सिर्फ तुझ तक दिखे जब सारी खुदाई
उस खुदाई को स्वीकार न करें, तो अब क्या करें?

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