Monday 25 August 2008

सब तकदीरें की कहानी इसी नहीं होतीं

न हिज्र का गिला न वस्ल की इल्तजा,
सब रिश्तों की बुनियाद ऐसी नहीं होती..
आगोश में जन्नत हो या दूरियों में दोज़ख
हर मोहब्बत की इन्तहा ऐसी नहीं होती...
नज़र-नज़र में गुफ्तगू सरे आम या तन्हाई में
सब की चाहत- ए- बयान ऐसी नहीं होती...
रुसवाइयां नीवं हो जिसकी बदनाम करें महबूब
कोचाहत-ए पाकीज़ की निशानियाँ ऐसी नहीं होती...
परवान चढ़ जाए जो मोहब्बत और खुशगवार भी हो
सब तकदीरों की कहानियां ऐसी नहीं होती...

2 comments:

  1. Rita ji...
    apki sabhi post padhi hain...
    acha likhti hain...
    par do bat kahna chahta hoon maf kr diziyega agar bura lage to...
    1..apne blog ka tamplates change kar den kuch white sa lagayein..
    jisse padhne main asani ho
    2..word veryfication hata dein...
    keep it up

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  2. that's batter background..
    but apne sord veriifcation nahin hataya...
    chaliye ummeed karta hoon age bhi apki rachnayen padhne ko milengi...
    good luck!

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