Tuesday, 26 August, 2008

तेरा साया

किसी को कैसे बताएं
तब क्या क्या होता है
जब रात के अँधेरे में
आसमान में चाँद तनहा होता है...

जब हरसिंगार खिलते हैं
जब हवा बहती है
जब मेरा एक ख्वाब
तेरे ख़्वाबों में आकर सोता है…

जब अपने घर के
बाम पर तू खड़ा
मेरे झरोखे की तरफ
चुपके से झाँक रहा होता है…

जब सबा के साथ
खुशबू तेरी आती है
जब सारा आलम मद मस्त सा
तेरे बदन सा महक रहा होता है…

तब तेरा मासूम चेहरा
तेरी आँखें, तेरी साँसे
तेरा साया और तू
मेरे पास कहीं खड़ा होता है

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